बंगाल में सियासी धमाका! TMC के 3 बड़े नेताओं ने एक साथ छोड़ा साथ, BJP में शामिल होते ही मच गई हलचल!
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं में सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाइक और सुखेंदु शेखर राय शामिल हैं। इन तीनों नेताओं ने पहले राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और उसके बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
एक साथ तीन वरिष्ठ नेताओं के बीजेपी में शामिल होने को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।
बीजेपी ने बताया ऐतिहासिक फैसला
पार्टी में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह बीजेपी के लिए गर्व का विषय है कि विभिन्न राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पार्टी की नीतियों पर भरोसा जताकर बीजेपी का हिस्सा बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बढ़ते जनाधार और जनता के बदलते राजनीतिक विश्वास का संकेत है। उनके मुताबिक, राज्य में परिवर्तन की इच्छा लगातार मजबूत होती जा रही है।
कौन हैं सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव भारतीय राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनका जन्म 25 सितंबर 1972 को हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने असम के सिलचर संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की थी। इसके अलावा वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और महिला नेतृत्व के प्रमुख चेहरों में उनकी पहचान रही है।
हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी उम्मीदवार राजदीप रॉय से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। बाद में वह पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद बनीं।
अब जून 2026 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
बीजेपी में शामिल होते ही सुष्मिता देव ने क्या कहा?
बीजेपी में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और डबल इंजन सरकार वाले राज्यों में विकास के कई उदाहरण देखने को मिले हैं।
उन्होंने दावा किया कि यदि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी को सरकार चलाने का अवसर मिलता है, तो राज्य में भी असम और त्रिपुरा की तरह व्यापक विकास देखने को मिलेगा।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा के हालिया बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। सुष्मिता देव ने कहा कि यदि टीएमसी के नेता स्वयं पार्टी के भीतर सुधार और शुद्धिकरण की बात कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि वे भी पार्टी के अंदर मौजूद समस्याओं को स्वीकार कर रहे हैं।
कौन हैं प्रकाश चिक बड़ाइक?
प्रकाश चिक बड़ाइक भी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
उन्होंने सिलीगुड़ी के सूर्यसेन कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की है। राज्यसभा में रहते हुए उन्होंने विभिन्न संसदीय विषयों पर पार्टी का प्रतिनिधित्व किया।
अब उन्होंने भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।
हालांकि बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने विस्तृत राजनीतिक बयान नहीं दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके इस फैसले को टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सुखेंदु शेखर राय कौन हैं?
सुखेंदु शेखर राय पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म वर्ष 1949 में हुआ था।
वे वर्ष 2011 से लगातार तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंचते रहे। पार्टी संगठन और संसदीय रणनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी।
लंबे समय तक टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहने के बाद उन्होंने जून 2026 में राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
बीजेपी में शामिल होने के बाद लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने कई गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित मामले के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोलकाता पुलिस आयुक्त और मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य से पूछताछ की मांग की थी।
उनका आरोप है कि इसके बाद उन्हें दबाव का सामना करना पड़ा।
सुखेंदु शेखर राय ने दावा किया कि एक ही दिन में उन्हें कोलकाता पुलिस की ओर से दो बार समन भेजा गया। उन्होंने यह भी कहा कि बीमारी की स्थिति में भी उन पर दबाव बनाया गया, जिसके बाद उन्हें न्यायालय का रुख करना पड़ा।
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने तथा अपहरण की धमकियां मिल रही थीं। उन्होंने इन्हीं परिस्थितियों को टीएमसी छोड़ने के प्रमुख कारणों में बताया।
इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या टीएमसी के लिए बढ़ रही है चुनौती?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों का एक साथ बीजेपी में शामिल होना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी माना जा सकता है।
हाल के महीनों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं द्वारा संगठन के भीतर सुधार की आवश्यकता पर सार्वजनिक बयान दिए गए हैं। ऐसे में विपक्ष इन घटनाओं को पार्टी के अंदर बढ़ती असंतोष की भावना के रूप में पेश कर रहा है।
दूसरी ओर टीएमसी का कहना है कि पार्टी मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से उसके संगठन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है। पार्टी राज्य में अपने जनाधार का विस्तार करने के लिए विभिन्न दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है।
उधर टीएमसी भी अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है। ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण?
तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों का एक साथ बीजेपी में शामिल होना निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि किसी भी दल-बदल का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव चुनावी नतीजों और जनसमर्थन से ही स्पष्ट होता है।
फिलहाल इतना तय है कि संसद के मानसून सत्र से पहले हुए इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इन नेताओं के बीजेपी में आने से राज्य की राजनीतिक रणनीति और चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
नोट: इस समाचार में शामिल राजनीतिक आरोप और बयान संबंधित नेताओं के सार्वजनिक दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष किसी सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जा सकता है।

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